Life Poetry

कौन हूँ मैं ?

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मैं प्रतिछाया उन चेहरों की हूँ ,
जो दुनिया के चेहरों में खो गए।
मैं बूँदें उन अश्कों की हूँ ,
जो बिना बहे भी रो गए।

 

मैं स्वर लहरी उन अधरों की हूँ ,
जो चुप्पी तोड़ नहीं पाए कभी।
मैं आस उन प्रयासों की हूँ ,
अघोषित रहे जिनके परिणाम सभी।

 

मैं राही उन रास्तों की हूँ ,
जिन्हें मंज़िल मिल नहीं पायी।
मैं ज्योति उन दीपों की हूँ ,
जिनकी बाती जल नहीं पायी।

 

मैं दुविधा उन ख़्यालों की हूँ ,
जो अंतर मन में रह जाते हैं।
मैं उड़ान उन परिंदों की हूँ ,
जो पिंजरे में कैद रह जाते हैं।

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1 Comment

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  1. rohit

    March 21, 2018 at 2:00 pm

    बढ़िया प्रयास

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